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कुँवर नारायण

कुँवर नारायण का जन्म 19 सितंबर 1927 को हुआ। नई कविता आंदोलन के सशक्त हस्ताक्षर कुँवर नारायण अज्ञेय द्वारा संपादित तीसरा सप्तक (1959) के प्रमुख कवियों में रहे हैं। कुँवर नारायण को अपनी रचनाशीलता में इतिहास और मिथक के जरिये वर्तमान को देखने के लिए जाना जाता है। कुंवर नारायण का रचना संसार इतना व्यापक एवं जटिल है कि उसको कोई एक नाम देना सम्भव नहीं। यद्यपि कुंवर नारायण की मूल विधा कविता रही है पर इसके अलावा उन्होंने कहानी, लेख व समीक्षाओं के साथ-साथ सिनेमा, रंगमंच एवं अन्य कलाओं पर भी बखूबी लेखनी चलायी है। इसके चलते जहाँ उनके लेखन में सहज संप्रेषणीयता आई वहीं वे प्रयोगधर्मी भी बने रहे। उनकी कविताओं-कहानियों का कई भारतीय तथा विदेशी भाषाओं में अनुवाद भी हो चुका है। ‘तनाव‘ पत्रिका के लिए उन्होंने कवाफी तथा ब्रोर्खेस की कविताओं का भी अनुवाद किया है। 2009 में कुँवर नारायण को वर्ष 2005 के लिए देश के साहित्य जगत के सर्वोच्च सम्मान ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
लखनऊ विश्वविद्यालय से अंगरेज़ी साहित्य में एम.ए. । आरम्भ से ही कविता के साथ-साथ चिन्तनपरक लेख, साहित्य समीक्षा,कहानियाँ भी लिखते रहे हैं । फिल्म समीक्षा तथा अन्य कलाओं पर भी उनके लेख नियमित रूप से पत्र-पत्रिकाओं में छपते रहते हैं । अनेक अन्य भाषाओं के कवियों का हिन्दी में अनुवाद किया है, और उनकी स्वयं की कविताओं और कहानियों के कई अनुवाद विभिन्न भारतीय और विदेशी भाषाओं और कहानियों के कई भाषाओं में छपे हैं । ‘आत्मजयी’ का 1989 में इतालवी अनुवाद रोम से प्रकाशित हुआ । ‘युगचेतना’ ‘नया प्रतीक’ तथा ‘छायानट’ के संपादक-मण्डल में रहे हैं। उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी के उपाध्यक्ष तथा भारतेन्दु नाट्य अकादमी के अध्यक्ष रह चुके हैं ।

1971 में हिन्दुस्तानी अकादमी पुरस्कार, 1973 में प्रेमचंद पुरस्कार,1982 में मध्य प्रदेश के तुलसी पुरस्कार और केरल के कुमारन् पुरस्कार तथा 1988 में हिन्दी साहित्य में विशेष योगदान के लिए हिन्दी संस्थान (उ.प्र.) द्वारा सम्मानित । उनकी प्रमुख प्रकाशित काव्य कृतियाँ हैं- चक्रव्यूह(1956), तीसरा सप्तक(1959), परिवेश : हम-तुम(1961), आत्मजयी/ प्रबन्ध काव्य(1965), अपने सामने(1979) । आकारों के आसपास(1971) उनका चर्चित कहानी संग्रह है । उन्होंने कॉन्सटैन्टीन कवाफ़ी तथा ख़ोर्खे-लुई बोर्खेस की कविताओं के अनुवाद(1986,1987) किया है ।

पुरस्कार सम्मान

कुँवर नारायण को वर्ष 2005 के ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया। छह अक्टूबर को राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने उन्हें देश के सबसे बड़े साहित्यिक सम्मान से सम्मानित किया।

ज्ञानपीठ के अलावा कुँवर नारायण को साहित्य अकादमी पुरस्कार, व्यास सम्मान, कुमार आशान पुरस्कार, प्रेमचंद पुरस्कार, राष्ट्रीय कबीर सम्मान, शलाका सम्मान, मेडल ऑफ़ वॉरसा यूनिवर्सिटी, पोलैंड और रोम के अन्तर्राष्ट्रीय प्रीमियो फ़ेरेनिया सम्मान और २००९ में पद्मभूषण सम्मान से सम्मानित किया गया।




































































































































































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